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Explainer: ट्रंप ने ईरान पर हमले को 10 दिन के लिए क्यों टाला? एक्सपर्ट्स ने बताई ये बहुत बड़ी वजह

 Published : Mar 28, 2026 08:32 am IST,  Updated : Mar 28, 2026 08:32 am IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला 10 दिन टालकर वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और तनाव कम करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल-गैस सप्लाई पर असर और कूटनीतिक बातचीत को मौका देने के लिए यह रणनीतिक फैसला लिया गया है।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Image Source : AP

इस्तांबुल/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले को 10 दिन के लिए टाल दिया है। इस फैसले के पीछे वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर बढ़ती चिंता को बड़ी वजह बताया जा रहा है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट के निदेशक अली वाएज ने ANI से बातचीत में कहा कि ट्रंप इस बात को समझते हैं कि अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर दुनिया के तेल और गैस बाजार पर पड़ेगा।

ईरान की धमकियों ने बदल दिया खेल?

वाएज ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप इसलिए हिचक रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि इस संघर्ष के बढ़ने से बाजार पहले ही चिंतित हैं। ट्रंप पहले ईरान के ऊर्जा ढांचे और बिजली ग्रिड को पूरी तरह नष्ट करने की धमकी दे चुके हैं। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी थी कि वह खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों और यहां तक कि इजरायल के बिजली नेटवर्क पर भी हमला कर सकता है।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसा होने पर यह वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए 'भयानक स्थिति' बन सकती है। इससे सिर्फ कुछ समय के लिए तेल निर्यात कम नहीं होगा, बल्कि कई महीनों या सालों तक उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

बाजार को भरोसा देने के लिए टाला हमला?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला होता है, तो इससे तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा और दुनिया भर में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वाएज ने यह भी बताया कि अभी कतर की गैस उत्पादन क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा पहले ही प्रभावित हो चुका है और इसे पूरी तरह ठीक होने में 3 से 5 साल लग सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका ने यह कदम बाजार को भरोसा दिलाने के लिए उठाया है।

अमेरिका कर रहा है बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी?

वाएज ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप एक तरफ यह दिखा रहे हैं कि कूटनीतिक बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ ये भी हो सकता है कि वे स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी कर रहे हों।' बता दें कि इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने घोषणा की थी कि वह ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले को 10 दिन के लिए टाल रहे हैं। यह नई समयसीमा 6 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि यह फैसला ईरानी सरकार के अनुरोध पर लिया गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत 'काफी अच्छी' चल रही है।

लगातार हमले की डेडलाइन बढ़ा रहे हैं ट्रंप

ट्रंप ने लिखा था, 'ईरान सरकार के अनुरोध पर मैं ऊर्जा संयंत्रों पर हमले को 10 दिनों के लिए रोक रहा हूं। बातचीत जारी है और यह बहुत अच्छी चल रही है, भले ही कुछ मीडिया रिपोर्ट्स इसके उलट कह रही हों।' इससे पहले सोमवार को भी ट्रंप ने 5 दिनों के लिए हमले को टालने का आदेश दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच 'अच्छी और सकारात्मक बातचीत' हुई है, जिसके आधार पर यह फैसला लिया गया। ट्रंप ने यह भी बताया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत का माहौल गंभीर, विस्तृत और रचनात्मक रहा है।

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Image Source : APईरान ने सऊदी में स्थित एयरबेस पर बड़ा हमला किया है।

मध्य-पूर्व एशिया में लगातार बदल रहे हालात

बता दें कि पिछले शनिवार को ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोले, वरना उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जा सकता है। ट्रंप द्वारा पहले 5 दिन और अब 10 दिन का अतिरिक्त समय देने से साफ है कि हालात लगातार बदल रहे हैं और अमेरिका अपनी रणनीति परिस्थिति के अनुसार तय कर रहा है। वहीं, ईरान की तरफ बातचीत में शामिल होने की बात को खारिज किया गया है और उसने शुक्रवार को सऊदी अरब में स्थित प्रिंस सुत्लान एयरबेस पर जोरदार हमला बोला जिसमें अमेरिका के कई सैनिक घायल हुए और विमानों को नुकसान पहुंचा।

आखिर किस तरफ जा रही है यह लड़ाई?

अमेरिका द्वारा हमले को टालना दिखाता है कि डोनाल्ड ट्रंप सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार और कूटनीति दोनों को एक लाइन में रखना चाहते हैं। ऊर्जा ढांचे पर हमला पूरे विश्व में तेल-गैस संकट और कीमतों में भारी उछाल ला सकता है, इसलिए फिलहाल संयम बरता गया है। आगे हालात दो दिशाओं में जा सकते हैं, अगर दोनों देशों के बीच किसी तरह की बातचीत सफल रही तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन अगर हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रही तो बड़ा सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है।

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